Sunday, January 8, 2012

कुछ जो दिल में था

ओकाद मेरी पूछ कर क्या हासिल होगा तुझे
प्यार से ज़रा गले तो लगा तुझे खुदा से मिलवा देता हु
हैसीयत का अपनी तुझे क्या नजारा दूँ 
किसी के होठो की मुस्कान तो बन तुझे दुखो से छुडवा देता हूँ 
गरीबी पर मेरी हसने वाले 
ज़रा किसी को दान तो कर तुझे मालिक की रजा बनवा देता हूँ 
मेरी बेचारगी को मेरी कमजोरी न समझ
खुदा से डरता हूँ इसलिए तुझे हमेशा जीतवा देता हूँ 

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