Sunday, January 8, 2012

कुछ जो दिल में था

ओकाद मेरी पूछ कर क्या हासिल होगा तुझे
प्यार से ज़रा गले तो लगा तुझे खुदा से मिलवा देता हु
हैसीयत का अपनी तुझे क्या नजारा दूँ 
किसी के होठो की मुस्कान तो बन तुझे दुखो से छुडवा देता हूँ 
गरीबी पर मेरी हसने वाले 
ज़रा किसी को दान तो कर तुझे मालिक की रजा बनवा देता हूँ 
मेरी बेचारगी को मेरी कमजोरी न समझ
खुदा से डरता हूँ इसलिए तुझे हमेशा जीतवा देता हूँ 

Monday, October 24, 2011

पाया कुछ भी नहीं था और खो बुहत कुछ दिया

जिंदगी में जो चाह वो पाया 
फिर पा कर सब खो भी दिया 
किस्मत का दोष कहू या दगा खुदा की
एक कोने में चुपचाप जाकर रो भी दिया 
जो सपने देखे इन आँखों ने 
उसकी देहलीज पर लाकर किस्मत ने उल्टा लौटा भी दिया 
गलतिय कहू इसे किसी की या सजा अपनी तकदीर की 
पाया कुछ भी नहीं था और खो बुहत कुछ दिया