ओकाद मेरी पूछ कर क्या हासिल होगा तुझे
प्यार से ज़रा गले तो लगा तुझे खुदा से मिलवा देता हु
हैसीयत का अपनी तुझे क्या नजारा दूँ
किसी के होठो की मुस्कान तो बन तुझे दुखो से छुडवा देता हूँ
गरीबी पर मेरी हसने वाले
ज़रा किसी को दान तो कर तुझे मालिक की रजा बनवा देता हूँ
मेरी बेचारगी को मेरी कमजोरी न समझ
खुदा से डरता हूँ इसलिए तुझे हमेशा जीतवा देता हूँ