जिंदगी में जो चाह वो पाया
फिर पा कर सब खो भी दिया
किस्मत का दोष कहू या दगा खुदा की
एक कोने में चुपचाप जाकर रो भी दिया
जो सपने देखे इन आँखों ने
उसकी देहलीज पर लाकर किस्मत ने उल्टा लौटा भी दिया
गलतिय कहू इसे किसी की या सजा अपनी तकदीर की
पाया कुछ भी नहीं था और खो बुहत कुछ दिया
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